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मेरे दादा जी ने सन 1962 ने मेरे ताऊ (कमलेश गुप्ता) के नाम पूरी जमीन कर दी थी। तब मेरे ताऊ की उम्र 2 साल थी। पर सन 1980 में दादा जी ने जिला न्यायालय में एक याचिका दाखिल की और जिला न्यायालय से आदेश पारित किया कि अब दादा जी के २ पुत्र और हैं। तो सन 1962 के फैसलें के अनुसार जिसमें ताऊ (कमलेश गुप्ता) को पूरी जमीन का मालिक दिखाया गया है। वह आदेश के अनुसार ताऊ (कमलेश गुप्ता) अब जमीन के मालिक नहीं है। ऐसा दादा जी ने जिला न्यायालय में पिटीशन दायर की थी। जिसमे न्यायालय से जिला न्यायाधीश का फैसला आया। कि अब प्रॉपर्टी में ताऊ (कमलेश गुप्ता) का कोई मालिकाना हक नहीं है। अब, दादा जी की मृत्यु के 5 साल बाद ताऊ ने सन 1962 के कागजों के आधार पर ताऊ ने भूलेख पर ऑनलाइन अपना नाम पड़वा लिया है जिसमें वह अपने आपको मालिक घोषित कर रहे हैं तथा पूरी बची हुई जमीन को बेचने के लिए दोनों भाइयों (मुनेंद्र गुप्ता और एकेस्वर गुप्ता) को धमकी दे रहे हैं। जब कि ताऊ (कमलेश गुप्ता) यहां पर रहते भी नहीं है। उन्होंने अपनी फैमिली को 20 साल पहले छोड़ दिया था। वह अपना हिस्सा पहले ही बेच चुके हैं और पूरे लगभग 80 लाख रुपए लेकर पिछले 10 सालों में पूरा खर्चा कर चुके हैं। अब वह दोबारा बची हुई जमीन को बेचना चाहते हैं सन 1962 की वसीयत के आधार पर, जब वे (ताऊ कमलेश गुप्ता) २ साल के थे, क्या हम सन 1980 के जिला न्यायालय के आदेश के अनुसार, क्या हम उन पर कार्यवाही कर सकते हैं?