पिता के जीवित रहते दो भाइयों में बंटवारा का क्या नियम है।

मेरे पिताजी दो भाई हैं, मेरी दादी इस दुनिया में नहीं है और मेरे बाबा चाहते हैं कि अपनी जाने से पहले सारी संपत्तियों का बंटवारा कर दे परंतु वह अपने बेटों के नाम नहीं अपने पोतों के नाम करना चाहते हैं। जिसमें मेरे पापा का एक बेटा है और मेरे बड़े पापा के दो बेटे हैं इसलिए संपत्ति का दिन हिस्सा होगा। क्या यह कानूनी तौर से सही है ? मेरे पापा पुलिस में कांस्टेबल है और मेरे बड़े पापा ब्याज पर पैसे वसूली का काम करते हैं और यह काम पहले मेरे बाबा और दादी किया करते थे इसके अलावा मेरे गांव में किराए पर कमरा दिया गऐ हैं इसके अलावा यहां कानपुर में किरायेदार है वो पैसे भी बड़े पापा लेते हैं, हमारा खेत में चार टावर लगे हैं उसका पैसा भी बड़े पापा के नाम पर है जो कि उनके बड़े बेटे के नाम कर दिया गया है । मेरे पापा १८ साल की उम्र से ही पुलिस की नौकरी करके सारी संपत्ति इकट्ठा किए हैं अपनी दिन रात की कमाई घर में लगा दिए हैं और आज बंटवारे के समय पर उन्हें तीसरा हिस्सा दिया जा रहा है क्योंकि उनको एक बेटा है और एक पूरी जमीन बड़े पापा के बेटीयों के शादी के लिए दे दी गयी और मुझे ना पढ़ाई के लिए कुछ दिया गया और ना ही शादी के लिए मैं पुलिस वाले की इकलौती बेटी हूं। हमारा एकमात्र बगीचा बड़े पापा को दे दिया गया और अब मेरे पापा तीसरे हिस्से को भी राजी हैं तो उन्हें वो भी नहीं दिया जा रहा। हमारा एक घर गोरखपुर में है जिसमें मेरे पापा ने कम पैसे दिए थे तो उन्हें 2 डिसमिल मिल रहा है और मेरे बड़े पापा को 3 डिसमिल। यहां कानपुर में मेरे पापा ने ज्यादा पैसे दिए तब भी उन्हें बेकार साइड दिया गया जोकि पापा के मन के लायक नहीं था लेकिन तब यहां ‌जमीन बंटवारा हुआ तब बड़े पापा ने कहा था कि गोरखपुर में जिधर मन उधर ले लेना और अब वह भी नहीं दे रहे हैं ऐसे स्थिति से निपटने के लिए हम क्या कर सकते हैं।